दान की महिमा

दान से. बडा कर्म नही

दान से बडा धर्म नही

वे दो मे वर्णित दान की महिमा

दान दिलाता.गौरव गरिमा

दान मे दान विदया.का दान

जिससे पशु भी बन जाता है इंनसान

बडी. महिमा हैं दान की

दान कराता है.पहचान सच्चे इन्सान की

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जिन्दगी

हसँना और हसँना जिन्दगी की जरूरत है ा

जिन्दंगी को ईस अन्दांज मे जियो कि लोग देखकर 

कहे वाह जिन्दंगी कितनी खूबशुरत है ा